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Thread: Gita Gyan in Hindi

  1. #1
    Senior Member
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    Jan 2009
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    chennai
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    147
    हे पार्थ !! (कर्मचारी),
    इनक्रीमेंट/ अच्छा नहीं हुआ, बुरा हुआ.
    इनसेंटिव नहीं मिला, ये भी बुरा हुआ
    वेतन में कटौती हो रही है बुरा हो रहा है, ..
    तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करो,
    तुम अगले इनसेंटिव की चिंता भी मत करो,
    बस अपने वेतन में संतुष्ट रहो.
    तुम्हारी जेब से क्या गया,जो रोते हो?
    जो आया था सब यहीं से आया था
    तुम जब नही थे, तब भी ये कंपनी चल रही थी,
    तुम जब नहीं होगे, तब भी चलेगी,
    तुम कुछ भी लेकर यहां नहीं आए थे..
    जो अनुभव मिला यहीं मिला
    जो भी काम किया वो कंपनी के लिए किया,
    डिग़्री लेकर आए थे, अनुभव लेकर जाओगे.
    जो कंप्यूटर आज तुम्हारा है,
    वह कल किसी और का था.
    कल किसी और का होगा और परसों किसी और का होगा..
    तुम इसे अपना समझ कर क्यों मगन हो ..क्यों खुश हो
    यही खुशी तुम्हारी समस्त परेशानियों का मूल कारण है
    क्यो तुम व्यर्थ चिंता करते हो, किससे व्यर्थ डरते हो,
    कौन तुम्हें निकाल सकता है ?
    सतत "नियम-परिवर्तन" कंपनी का नियम है
    जिसे तुम "नियम-परिवर्तन" कहते हो, वही तो चाल है
    एक पल में तुम बैस्ट परफॉर्मर और हीरो नम्बर वन या सुपर स्टार हो,
    दूसरे पल में तुम वर्स्ट परफॉर्मर बन जाते हो ओर टारगेट अचीव नहीं कर पाते हो..
    ऎप्रेजल,इनसेंटिव ये सब अपने मन से हटा दो,
    अपने विचार से मिटा दो,
    फिर कंपनी तुम्हारी है और तुम कंपनी के..
    ना ये इन्क्रीमेंट वगैरह तुम्हारे लिए हैं
    ना तुम इसके लिये हो,
    परंतु तुम्हारा जॉब सुरक्षित है
    फिर तुम परेशान क्यों होते हो..?
    तुम अपने आप को कंपनी को अर्पित कर दो,
    मत करो इनक्रीमेंट की चिंताबस मन लगाकर अपना कर्म किये जाओ
    यही सबसे बड़ा गोल्डन रूल है
    जो इस गोल्डन रूल को जानता है..वो ही सुखी है..
    वोह इन रिव्यू, इनसेंटिव ,ऎप्रेजल,रिटायरमेंट आदि के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है.
    तो तुम भी मुक्त होने का प्रयास करो और खुश रहो..
    तुम्हारा बॉस कृष्ण

    vijay



  2. #2
    Senior Member
    Join Date
    Jan 2009
    Location
    chennai
    Posts
    147
    what you are thinking. tell me right now. jut contact me.
    vijay

  3. #3

    Join Date
    Jan 2009
    Location
    dallas
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    5
    Hey friend what exactly you are trying to say? Please be more specific. I am not getting your post properly but i would like to share one thing about making your original work secured. I would like to tell you about the copyright through which you can be assured that no one can make a duplicate version of your work. So it is always a good option to make copyright of your original work.




    [url]http://www.wcauk.com/[/url]

  4. #4

    Join Date
    Nov 2008
    Location
    chandrapur
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    238
    Yes vijay
    marsh is right. I am also not getting it.
    this post has nothing to do with book forum.

  5. #5

    Join Date
    Oct 2009
    Location
    bangalore
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    5
    good post .
    i like ur sense of humour post some more

  6. #6
    > vijaysaini005 wrote:

    > हे पार्थ !! (कर्मचारी),
    इनक्रीमेंट/ अच्छा नहीं हुआ, बुरा हुआ.
    इनसेंटिव नहीं मिला, ये भी बुरा हुआ
    वेतन में कटौती हो रही है बुरा हो रहा है, ..
    तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करो,
    तुम अगले इनसेंटिव की चिंता भी मत करो,
    बस अपने वेतन में संतुष्ट रहो.
    तुम्हारी जेब से क्या गया,जो रोते हो?
    जो आया था सब यहीं से आया था
    तुम जब नही थे, तब भी ये कंपनी चल रही थी,
    तुम जब नहीं होगे, तब भी चलेगी,
    तुम कुछ भी लेकर यहां नहीं आए थे..
    जो अनुभव मिला यहीं मिला
    जो भी काम किया वो कंपनी के लिए किया,
    डिग़्री लेकर आए थे, अनुभव लेकर जाओगे.
    जो कंप्यूटर आज तुम्हारा है,
    वह कल किसी और का था.
    कल किसी और का होगा और परसों किसी और का होगा..
    तुम इसे अपना समझ कर क्यों मगन हो ..क्यों खुश हो
    यही खुशी तुम्हारी समस्त परेशानियों का मूल कारण है
    क्यो तुम व्यर्थ चिंता करते हो, किससे व्यर्थ डरते हो,
    कौन तुम्हें निकाल सकता है ?
    सतत "नियम-परिवर्तन" कंपनी का नियम है
    जिसे तुम "नियम-परिवर्तन" कहते हो, वही तो चाल है
    एक पल में तुम बैस्ट परफॉर्मर और हीरो नम्बर वन या सुपर स्टार हो,
    दूसरे पल में तुम वर्स्ट परफॉर्मर बन जाते हो ओर टारगेट अचीव नहीं कर पाते हो..
    ऎप्रेजल,इनसेंटिव ये सब अपने मन से हटा दो,
    अपने विचार से मिटा दो,
    फिर कंपनी तुम्हारी है और तुम कंपनी के..
    ना ये इन्क्रीमेंट वगैरह तुम्हारे लिए हैं
    ना तुम इसके लिये हो,
    परंतु तुम्हारा जॉब सुरक्षित है
    फिर तुम परेशान क्यों होते हो..?
    तुम अपने आप को कंपनी को अर्पित कर दो,
    मत करो इनक्रीमेंट की चिंताबस मन लगाकर अपना कर्म किये जाओ
    यही सबसे बड़ा गोल्डन रूल है
    जो इस गोल्डन रूल को जानता है..वो ही सुखी है..
    वोह इन रिव्यू, इनसेंटिव ,ऎप्रेजल,रिटायरमेंट आदि के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है.
    तो तुम भी मुक्त होने का प्रयास करो और खुश रहो..
    तुम्हारा बॉस कृष्ण

    vijay

  7. #7
    vijaysaini005, India
    Senior Member

    I think You are a fool as you are making fun of Holy & Sacred Book "Geeta" by Lord Krishna. You are a creature of Kalyug. So You cann't understand the values & importance of Geeta.

  8. #8

    Join Date
    Jul 2010
    Location
    Gurgaon
    Posts
    10
    Whatever has happened, has happened for good.
    Whatever is happening, is happening for good.
    Whatever is going to happen, it will be for good.
    What have you lost for which you cry?
    What did you bring with you, which you have lost?
    What did you produce, which has destroyed?
    You did not bring anything when you were born.
    Whatever you have, you have received from Him.
    Whatever you will give, you will give to Him.
    You came empty handed and you will go the same way.

    Whatever is yours today was somebody else's yesterday and will be somebody else's tomorrow.

  9. #9

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    Jul 2010
    Location
    Delhi
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    6
    This is really great and useful.
    Thanks for sharing.

    Shekhar



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